असफलता ही सफलता का मार्ग

असफलता ही सफलता का मार्ग
असफलता ही सफलता का मार्ग

“असफलता ही सफलता का मार्ग हैं”, लेख का यह शिर्षक ही अपने आप में कितना मोटिवेशनल है। क्योंकि यह बिल्कुल सही है कि, सफलता की मंजील तक पहुंचने के लिए तो असफलता की सिढियां चढ़कर ही जाना होता है। बहुत ही कम ऐसे लोग होते हैं, जो अपने पहले प्रयास में ही सफल हो जाते हैं।

इसलिए, अपने सपनों को पूरा करने में या अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए, अगर हमें बार बार असफलता मिल रही है, तो इससे घबराना नहीं चाहिए, बल्कि अपने प्रयास करने के तरीके का विश्लेषण करना चाहिए। अपयश या असफलता तो हमें सीखाती है कि यश या सफलता तक पहुंचा कैसे जा सकता है।

वास्तव में अगर देखा जाए तो, असफलता… एक अच्छे टीचर की तरह है, जो हमें सिखाती है। हमारी गलतियों पर ध्यान देने और उन गलतियों से सीख लेकर, फिर से प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित करती है। हमारा मार्गदर्शन करती है। और जो भी अपनी गलतियों से सीखकर आगे बढ़ता है, वह एक ना एक दिन सफल जरुर होता है।

असफलता को हमेशा एक अवसर की तरह देखा जाना चाहिए। यह वह अवसर होता है, जब हम खुद को पहचान सकते हैं, अपनी कमियों को जान सकते हैं।  लेकिन कई लोग, असफलता को एक्सेप्ट नहीं कर पाते हैं और असफलता मिलते ही आगे प्रयास करना ही छोड़ देते हैं। लेकिन यहां वे यह भूल जाते हैं कि, यहां पर सब कुछ समाप्त नहीं हो जाता है। ऐसे हारकर बैठ जाने से तो, केवल निराशा ही हाथ लगती है।

हम सभी के लिए, यह जानना बहुत जरूरी है कि, मात्र एक असफलता, हमारे पूरे जीवन की दिशा तय नहीं कर सकती हैं। असफलता को कभी भी आखिरी मौका नहीं समझना चाहिए, बल्कि इसे तो, अपनी सफलता की शुरुआत समझना चाहिए।

दोस्तों, हारना या असफल होना, बिल्कुल भी बुरी बात नहीं है, बुरी बात तो प्रयास ना करना या प्रयास करना ही छोड़ देना होती है। हम यह क्यों भूल जाते हैं कि, असफल तो वही होता है, जो प्रयास करता है। जो प्रयास ही नहीं करता है, वह ना तो सफल होता है और ना ही असफल। हम असफल हुए हैं, इसका मतलब ही यह हैं कि, हमने कम से कम प्रयास तो किया हैं। कुछ लोग तो ऐसे भी होते हैं, जो सपने तो देखते हैं, लेकिन उसके लिए ना तो मेहनत करते हैं और ना ही कोई  प्रयास करते हैं। और कुछ लोग तो असफलता के डर से प्रयास करने के पहले ही हार मान लेते हैं।

हमारी मंजिल के रास्ते में मुश्किलें और बाधाएं तो आएगी ही। यह रास्ता बड़ा ही उबड़ खाबड़ भी हो सकता है, जिस पर चलना आसान नहीं होगा, और ऐसे रास्ते पर चलते चलते हम यदि लड़खड़ाकर गिर भी जाते हैं, तो यह बिल्कुल सामान्य बात है। यह ना तो शर्मिंदगी या दुख की बात है, और ना ही यह आपकी असफलता हैं,  इसे असफलता तो तब ही माना जाएगा, जब आप उठकर फिर से खड़ा रहना ही ना चाहें, फिर से कोशिश ही ना करें या फिर से चलने की हिम्मत ही जुटा ना पाएं।

दोस्तों, जिस तरह हम सफलता का स्वागत, हंसते हुए करते हैं, असफलता को भी हमें उसी तरह, खुशी खुशी स्वीकार करना आना चाहिए। इससे हमें निराशा नहीं होती है और हमारा मन भी शांत रहता है, जिससे हम, थंडे दिमाग से सोच सकते हैं और आगे बढ़ने की बात पर विचार कर सकते हैं।

कई बार हम असफलता को अपना अपमान तक मान बैठते हैं, जो कि बिलकुल भी सही नहीं है। अपनी असफलता के लिए खुद को दोषी समझना भी, उस स्थिति में बिल्कुल भी सही नहीं है, जब आपकी लगन सच्ची हो और आपने वास्तव में इमानदारी से मेहनत और प्रयास किया हो। और कई बार ऐसा भी होता है, जब हम प्रयास करते हैं, जी जान से मेहनत भी करते हैं लेकिन सफलता नहीं मिलती है, लेकिन इस पर बहुत अधिक सोच विचार करते बैठने की बजाय, हमें वह समय, अपने आप का विश्लेषण करने में लगाना चाहिए। हमें इस बात पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए कि हमारे प्रयास में कमी कहां पर रह गई है। हम कहां कम पड़ गए हैं। क्योंकि जो हो गया है, उस पर पछतावा करने से तो, हमारा वह मूल्यवान समय ही बर्बाद होगा, जिसे हम अपने आप को निखारने में इस्तेमाल कर सकते हैं।

जीवन में यदि असफलता मिलने से आप निराश हो गए हैं, हताश हो गएं है, डर गए हैं और अपने आप से, परिस्थितियों से, समय से या फिर किसी व्यक्ति को कारण मानकर उससे नाराज़ हो गएं है, और हार मानकर बैठ गए हैं, तो फिर आपको अब्राहम लिंकन की लगातार असफलता, संघर्ष और फिर संघर्ष से मिलने वाली सफलता की कहानी जरुर जरुर जाननी चाहिए।

क्योंकि अमेरिका जैसे ताकतवर देश का प्रधानमंत्री बनने के, उनके सफर के बारे में, यदि आप जान लेंगे तो आपको अंदाजा हो जाएगा कि, अपनी जिस एक असफलता से ही आप हार मानकर बैठे हुए हैं, वह तो दरअसल कुछ भी नहीं है। और आपको महसूस होगा कि, जो हौसला आपके अंदर था, उसे आपने कितनी आसानी से खो दिया है।

एक बेहद गरीब परिवार में जन्म लेने वाले, अब्राहम लिंकन के जीवन में पारिवारिक समस्याओं की शुरुआत, उनके जन्म से ही हो गई थी, जो उनके काफी बड़े होने तक भी चलती ही रही थी। लेकिन उन्होंने इन समस्याओं से उत्पन्न होने वाले दुखों पर हमेशा मात की। बिजनेस में असफलता, वार्ड मेंबर के चुनाव में असफलता, स्टेट रजिस्ट्रार के चुनाव में असफलता, फिर से एक बार नया बिजनेस और उसमें भी असफलता, 43 साल की उम्र में कांग्रेस के चुनाव में असफलता, 48 साल की उम्र में फिर से एक बार प्रयास लेकिन फिर से उन्हें असफलता ही हाथ लगी। इसी तरह उन्होंने 55, 56 और 59 साल की उम्र में, लगातार चुनाव लड़ा, लेकिन उसमें भी उन्हें मिली तो बस असफलता। इतनी बार असफलता का मुंह देखने पर तो कोई भी घुटने टेक देता, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। वे लगातार हार तो रहे थे लेकिन फिर भी कोशिश पर कोशिश करते ही जा रहे थे। हालांकि वे एक बार डिप्रेशन और एक बार नर्वस ब्रेकडाउन का शिकार भी रहे थे लेकिन उससे भी वे जल्दी ही उबर गए थे। आखिरकार सन् 1960 में उन्होंने राष्ट्रपति का चुनाव लडा और उसमें विजयी होकर, अमेरिका के सोलहवें राष्ट्रपति बने।

तो फिर देखा आपने, कि असफलता को किस तरह स्वीकार किया जाता है और किस तरह इस पर मात करके, अपने लक्ष्य तक पहुंचने का रास्ता बनाया जाता है। जीवन में मिलने वाली असफलता, हमें बर्बाद करने के लिए ही नहीं आती है, बल्कि हम इन असफलताओं को किस प्रकार ग्रहण करते हैं और इन्हें मात देकर किस तरह फिर से आगे बढ़ते हैं और सफल होते हैं, यह सिखाने के लिए आती है।

वास्तव में यदि देखा जाए तो, असफलता तो इंसान को मिलनी ही चाहिए, यह हमें जीवन का वो अनुभव देती हैं, जो हमें और कोई नहीं दे सकता है। हर व्यक्ति के जीवन में असफलता, मुश्किलें, दुख या बाधाएं तो आनी ही चाहिए, ताकि उन परिस्थितियों में आप खुद से मिल सकें। खुद को पहचान सकें, आपका अपने आप पर कितना विश्वास है यह जान सकें। और उन मुश्किलों से लड़कर, उन्हें हराकर जब आपको सफलता मिलती है ना, तो उसका तो स्वाद ही कुछ खास होता है। असफलता मिलने पर ही व्यक्ति, सफलता की किमत करता है और सफलता को पचा पाता है।

इसलिए दोस्तों, असफलता से परेशान नहीं होना चाहिए, उसे तो अपना गुरु, मित्र, मार्गदर्शक मानना चाहिए, जो हमें सफलता तक पहुंचाते हैं।

तो फिर आज से ही इसे आप अपने जीवन का एक मूलमंत्र बना लें, कि असफलता मिलने पर उसे स्वीकार करेंगे, उस पर विश्लेषण करेंगे, जब तक मंजिल मिल नहीं जाती अपना संघर्ष और प्रयास जारी रखेंगे, और तब तक हार नहीं मानेंगे, जब तक हमारी हार हमारी जीत में बदल नहीं जाती है। क्योंकि हारता तो वही है जो हार मान लेता है, और जो हार कर फिर से जीतने का हौसला रखता है वो एक ना एक दिन जरुर जीतता है। और इतिहास भी बनाता है।

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