खुद पर विश्वास

khud par vishvaas

“अंधेरों से मिलकर ही तो, उजालें होते हैं,

छंट ही जाते हैं वो बादल, जो काले होते हैं।

वक्त और हालात की जंग को, हौंसलों से जीत जाते हैं,

कुछ लोग अपनी क़िस्मत, खुद ही लिखने वाले होते हैं।”

जीवन में कई बार, कई कारणों से हम निराश हो जातें हैं। कभी असफलता से, कभी किसी उम्मीद के टूट जाने से तो कभी किसी हार से हमारा मनोबल गिर जाता है और हम निराशा से घिर जाते हैं। ऐसे समय पर आवश्यकता होती है एक नई उम्मीद की जो हमें फिर से उठकर खड़ा करने में सहायता करती है। और वो उम्मीद है खुद पर विश्वास।

खुद पर विश्वास रखकर हम हर मंजिल तक पहुंच सकते हैं।समय और परिस्थितीयों को बदलने में देर नहीं लगती है, आज यदि हम नाकाम है तो कल जरुर कामयाब होंगे।बस थोड़ा सा सब्र और विश्वास रखने की आवश्यकता है।

सृष्टि की रचना करते समय ईश्वर ने किसी के साथ भी अन्याय नहीं किया है। उसने पशु पक्षी हो, पेड़ पौधे हो या इंसान हो सभी को किसी ना किसी विशेषता के साथ ही इस धरती पर भेजा है। तो हममे भी कोई ना कोई खासियत जरुर ही होगी। बस जरूरत है तो उसे पहचानने की। ये भी सच है कि कोई भी इंसान परिपूर्ण नहीं होता है,हर किसी के अपने गुण और अवगुण होते हैं। तो यदि हमारे अंदर कोई कमी है भी तो अच्छाई भी अवश्य ही होंगी। जरुरत है उसे पहचानने की।

हमारे समाज की ये एक विडम्बना ही है कि लोग आपकी अच्छाइयों से ज्यादा आपकी कमजोरियों पर ज्यादा ध्यान देते हैं, और समय समय पर, अपनी बातों से उसे आप पर जाहिर भी करते रहते हैं,ताकि अपनी कमजोरियों को, आपकी कमियों के नीचे ढ़क सके।परंतु यह सिर्फ आप पर निर्भर करता है कि आपको इन सब बातों को कितनी तवज्जो देनी चाहिए। क्या आपको लोगों की बातों को महत्व देना है या खुद की काबिलियत पर ध्यान देना है इसका निर्णय तो सिर्फ आप ही कर सकते हैं।

कई बार लोग, दुसरो को सफल होता हुआ नहीं देख सकते हैं। वे निरंतर अपनी बातों से या अपने व्यवहार से आपका मनोबल गिराने की कोशिश करते रहते हैं, पर आपका ध्यान उनकी बातों पर नहीं बल्कि अपने आप पर होना चाहिए।आपको सिर्फ अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना है। आपने सुना ही होगा,”कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना”। अतः दुसरो की चुभने वाली बातों से खुद को दुःख देने और अपना मनोबल कम करने के बजाय उनकी बातों को एक कान से सुनकर दुसरे कान से निकाल देना चाहिए।

आपकी मंजील का हर रास्ता संघर्ष से भरा है। अपनी कामयाबी की मंजील तक पहुंचने के लिए आपको कई बाधाओं और मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।और ये मुश्किलें कई बार आपका हौसला पस्त कर सकती हैं और आप आपके मार्ग से विचलित हो सकते हैं।ऐसे ही कठीन और दुविधा पूर्ण समय में सबसे ज़्यादा अगर कोई आपकी मदद कर सकता हैं तो वो बस आप स्वयं ही है। क्योंकि आपके अंदर की आवाज और भरोसा ही आपको आगे बढ़ने में सहायता करता है।

हार और जीत, सफलता और असफलता ये सब एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जैसे सिक्का उछालकर हम यह नहीं कह सकते हैं कि हेड आएगा या टेल वैसे ही हमारे द्वारा शुरु किए गए किसी काम की परिणति क्या होगी हम या कोई और कैसे बता सकता है। हमारे हाथ में तो बस पूरी इमानदारी और मेहनत से प्रयास करना ही हो सकता है। अतः हमें अपनी कड़ी मेहनत, काम के प्रति अपनी लगन और ईमानदारी,और सबसे बढ़कर अपने आप पर विश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

एक छोटे से पक्षी से ही हम सीख ले सकते हैं, जो अपने आप उड़ना सीख लेता है,पर अपनी पहली उड़ान भरने के पहले कई बार गिरता है और उठता है और छोटी-छोटी उड़ाने भरते-भरते एक दिन पूरा आसमान नाप लेता है। क्या आपने कभी किसी को इसमें उसकी सहायता करते हुए देखा है? क्योंकि वो छोटा सा पक्षी खुद ही अपनी मदद करने में सक्षम होता है। कई बार गिरकर और असफल होकर भी वो फिर से उठता है और कोशिश करता है क्योंकि उसे अपने आप पर और अपने पंखों पर अटूट विश्वास होता है।

एक नन्ही सी चिंटी भी पहाड़ पर चढ़ने का हौसला रखती है क्योंकि उसे भी अपने हौसले और मेहनत पर इतना भरोसा होता है कि, छोटे-छोटे कदम बढ़ाते हुए अपने रास्ते में आने वाली हर मुश्किल का सामना करते हुए, एक दिन अवश्य वो अपनी मंजिल तक पहुंच ही जाएंगी। फिर हम तो एक सक्षम और सबल इंसान हैं।

कुछ लोग केवल हवाई किले ही बनाते हैं और बिल्कुल भी मेहनत नहीं करते हैं और कुछ लोग अपने सपनों को साकार करने के लिए वाकई जी तोड़ कर मेहनत करते हैं,पर यदि उन्हें सफलता नहीं मिलती, इसके पीछे तो कई और भी कारण हो सकते हैं,पर दोनों ही सूरतों में  दोष केवल किस्मत का माना जाता है। यदि हम किस्मत पर  यकीन करते हैं तो पहले हमें यह समझना होगा कि किस्मत क्या है?हमारी किस्मत कौन बनाता या बिगाड़ता है ?कौन हमारी किस्मत लिखता है? हम यदि यह मानते हैं कि हमारी किस्मत की चाबी ऊपरवाले के हाथ में होती है,और जब वह हम पर मेहरबान होता है तभी हमें सफलता मिलती है तो हमें ये भी मानना होगा कि भगवान भी उसी की सहायता करता है जो खुद की सहायता करता है, अर्थात भगवान भी उसी पर विश्वास करते हैं जो खुद पर विश्वास करता है और केवल किस्मत के भरोसे ना बैठकर मेहनत भी करता है। आपने ये पंक्तियां तो जरूर ही सुनी होगी, “मत कर भरोसा अपनी किस्मत की लकीरों पर, किस्मत तो उनकी भी होती है,जिनके हाथ नहीं होते हैं’। तो हमें हर परिस्थिति में सिर्फ और सिर्फ अपने आप पर और अपनी मेहनत पर ही विश्वास रखना होगा।और अपनी किस्मत को खुद ही लिखना होगा।

विश्वास चाहे दूसरों पर हो या खुद पर,कभी टूटना नहीं चाहिए। क्योंकि एक बार यदि विश्वास टूट जाता है,तो उसका दुबारा जुड़ना मुश्किल होता है। इसलिए परिस्थितियां चाहे कितनी भी विकट क्यों ना हो, हमें अपना हौसला और विश्वास हमेशा बनाए रखना होगा, और जीवन की हर परीक्षा में पास होकर दिखाना होगा।

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