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मुश्किल समय में इंसानियत का होना कितना जरूरी है?

मुश्किल समय में इंसानियत का होना कितना जरूरी है

ना ईश्वर बन, ना खुदा बन, ना महान बन,

तू इंसानियत दिखा और केवल इंसान बन।

दोस्तों, विश्व के सभी धर्मों में आपस में वैचारिक मतभेद जरुर हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत यानी कि मानवता को ही प्रत्येक धर्म में, सबसे श्रेष्ठ धर्म माना गया है। सभी धर्म यही मानते हैं कि, इंसानियत, मनुष्य का सर्वश्रेष्ठ गुण है, उसका धर्म है और उसका कर्तव्य भी है।

साधारण शब्दों में, इंसानियत को हम इस प्रकार परिभाषित कर सकते हैं कि, किसी भी प्राणी चाहे वो मनुष्य हो या पशु, उसके लिए मन में दया भाव रखना और किसी भी तरह का भेदभाव किए बिना, विपरित परिस्थितियों तथा मुश्किल के समय में उनकी सहायता करने के लिए तत्पर रहना ही इंसानियत होती है। यह भावना ईश्वर ने केवल मनुष्य में ही दी है, और यही कारण है कि मनुष्य, पशुओं से अलग हैं।

इसलिए, इंसानियत का होना ही, मनुष्य होने का सबसे बड़ा सबूत है। और ईश्वर कई अवसर भी हमें देता है जब हमें अपनी इंसानियत दिखानी होती है।

दोस्तों, हमारा हर दिन एक जैसा नहीं होता है। जीवन में धूंप और छांव का खेल तो चलता ही रहता है और यही जीवन की सच्चाई हैं कि कभी सुख है तो कभी दुख है और कभी दुख है तो सुख भी हैं। हंसते खेलते जीवन में भी कब दुख के बादल आ जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता है। मुश्किलें और परेशानियां कब हमारे दरवाजे पर दस्तक दे दे, कह नहीं सकते हैं। कभी कभी तो ये मुश्किलें इतनी बढ़ जाती है कि इंसान इसमें उलझकर ही रह जाता है और उसका मनोबल टूटने लगता है।  ऐसे समय में उसे जरुरत होती है, किसी सहारे की, किसी ऐसे हाथ की जो उसे इस मुश्किल से बाहर निकाल सके। मुश्किल घड़ी में कोई उसके साथ खड़ा हो जाए या और कुछ नहीं तो कम से कम तसल्ली के दो बोल ही बोल दें तो भी उसे हौसला मिल जाता है। और जब ऐसे मुश्किल समय में, किसी का साथ, किसी का मदद का हाथ या किसी के तसल्ली के दो बोल ही उसे मिल जाए तो उसमें फिर से उठकर खड़े होने का साहस आ जाता है।

वो कहते हैं ना कि मुश्किल समय में ही इंसान की सही पहचान होती है, इसलिए मुश्किल दौर में, इंसानियत का परिचय देकर, जो हमारा साथ दे दे वही हमारा सच्चा साथी होता है, चाहे फिर वो हमारा रिश्तेदार हो, हमारा दोस्त हो, हमारा पड़ोसी हो, हमारा जानने वाला हो या फिर कोई अजनबी ही क्यों ना हो।

इंसानियत का दूसरा अर्थ है, इंसान के द्वारा इंसान की कदर करना। इंसानियत यानी कि बिना स्वार्थ के दूसरे के लिए आगे बढ़ाया गया मदद का हाथ।

विपदाएं और संकट कभी भी बताकर या पूर्व सूचना देकर नहीं आते हैं दोस्तों, इसलिए हम मानसिक रूप से इसके लिए तैयार हो ये जरुरी नहीं है। अभी हम सभी ने कोविड का दौर देखा ही है। यह एक ऐसा संकट था, जिससे लगभग हर इंसान किसी ना किसी रूप में प्रभावित जरुर हुआ था। किसी ने अपनी जान गंवाई तो किसी ने अपने अपनो को खो दिया। एक अनदेखे और अनजाने जीव ने हम सभी को घरों में कैद हो जाने पर मजबूर कर दिया था। चारो तरफ डर और दहशत का माहौल बना हुआ था और लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों में बैठे हुए थे। गलियां शहर सब सुनसान थे, लेकिन ऐसी खतरनाक स्थिति में भी करोड़ों लोग ऐसे भी थे जो अपनी जान को जोखिम में डालकर, केवल दूसरों की मदद के लिए बाहर निकले थे। एक सफाईकर्मी और किराने वाले से लेकर तो सैनिक, पुलिस दल, डॉक्टर और नर्सेस सबने अपने अपने काम को फर्ज समझकर किया।  इनमें से कितने ही लोगों ने दूसरों की मदद करते हुए, अपनी खुद की जान भी गंवा दी थी। इस कठिन और मुश्किल समय में इन लोगों ने इंसानियत को अपने आप से उपर रखा और इंसानियत का फर्ज निभाया। अब जरा सोच कर देखिए कि, हमारे ऐसे मुश्किल समय में, वे सब लोग भी अगर घर में ही रहते, तो क्या होता? कितनी भयावह स्थिति बन जाती। इसलिए मुश्किल समय में इंसानियत का होना और उसे दिखाना बेहद जरूरी है।

इसी तरह भूकंप, बाढ़, सूखा जैसी प्राकृतिक आपदाओं में भी जब इंसान को इंसान की सबसे ज्यादा जरुरत होती है, मानवता को दिखाना जरुरी होता है।

दोस्तों, हम अपने आसपास नजर दौड़ाएं तो कुछ लोग जहां पर इंसानियत की मिसालें कायम कर रहे हैं, तो वहीं पर कुछ लोग, घिनौने अपराधों को अंजाम देकर, इंसानियत को शर्मसार करने से नहीं कतरा रहे हैं। कई बार तो हम खुद और हमारे जैसे अनेक लोग, अपनी आंखों के सामने हो रहे अन्याय को देखकर आंखें मूंद लेते हैं और हमारी तरफ उम्मीद से देख रही आंखों को नजरंदाज करके, कुछ नहीं करते हैं। यहां हमारी मजबूरी भी हो सकती है, लेकिन इंसानियत तो फिर भी हार जाती है।

इसी तरह सड़क हादसा या कोई दुर्घटना होने पर, जब इंसान को इंसान की सबसे ज्यादा जरुरत होती है, लोग केवल तमाशबीन बने खड़े हो जाते हैं, और ये सोचकर मदद करने के लिए आगे नहीं आते हैं कि कौन मुसीबत को मोल ले। कुछ निर्दयी लोग तो मदद करने के बजाय,  ऐसी दुखद घटनाओं का विडियो बनाने से भी बाज नहीं आते हैं। और इस दौरान इंसान, उनकी आंखों के सामने, वहीं तड़प तड़प कर दम तोड़ देता है। जबकि यहां उसके इस सबसे ज्यादा मुश्किल समय में, अगर इंसानियत का एक हाथ भी उसे मिल जाता, तो उसकी जान बच सकती थी। इसलिए मुश्किल समय में इंसानियत दिखाना बेहद जरूरी होता है।

इसी तरह कुछ परिस्थितियों जैसे छेड़छाड़ होने पर, लूटमार होने पर, लड़ाई या दंगा आदि होने पर अक्सर लोग एक दूसरे की मदद करने से डरते हैं और आगे बढ़ कर मदद नहीं करते हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि कोई मदद करना ही नहीं चाहता है, लेकिन वो चाहकर भी ऐसा नहीं कर पाते हैं। क्योंकि छेड़छाड़ करने वाले, दंगा करने वाले, लूटमार करने वाले लोगों का यूं भी कोई भरोसा नहीं होता है कि वो अपने मकसद को पूरा करने के लिए क्या कर बैठें और ऐसे लोगों से इंसानियत की उम्मीद करना भी तो बिल्कुल ही बेमानी है। और कहीं वो हमें भी नुकसान ना पहुंचा देगा, इस डर से सब, ना चाहते हुए भी अपने कदम पीछे खींच लेते हैं। लेकिन अगर यहां एकजुट होकर सामना किया जाए तो, मुश्किल में फंसे इंसान की मदद हो सकती है।

इसके विपरित, हमारे समाज में, हमारे आसपास, हमें कई लोग ऐसे भी दिख जाएंगे जो अपना सारा जीवन मानवता को समर्पित कर देते हैं और लोगों की मुश्किलें तथा परेशानियों को दूर करने का प्रयास करते रहते हैं। किसी ना किसी तरीके से ये लोग लोगों की मदद करते रहते हैं और अपने अंदर की इंसानियत को जगाए रखते हैं।

हमेशा कोशिश करते रहिए दोस्तों, कि आप भी अपने अंदर की इंसानियत को जिंदा रखते हुए, किसी के मददगार बनकर, उसके मुश्किल समय में उसका साथ दे सकें और इंसान बनकर अपनी इंसानियत का परिचय दे सकें। पैसों से चाहे आप किसी की मदद ना भी कर पाएं, लेकिन कई और भी तरीके हैं जब आप लोगों की मुसीबत में उनके साथी बन सकते हैं। जैसे रक्तदान करके, किसी दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुंचाकर, आपदा में श्रमदान करके, अनाथालय या वृद्धाश्रम में जाकर या मानसिक रूप से बीमार या अवसादग्रस्त लोगों के साथ समय बिताने, जैसे कई काम हैं, जो आप निस्वार्थ भाव से कर सकते हैं। यहां पर पैसों से बढ़कर, इंसान की इंसानियत ही काम आती है। आप मुश्किल में फंसे किसी बच्चे, बुढ़े, अपाहिज या मजबूर लोगों को सहारा दे सकते हैं। यकीन मानिए दोस्तों, किसी जरुरतमंद की मदद करने से, किसी के मुरझाए चेहरे पर खुशी लाने से या किसी को उपर उठाने से आपको जो खुशी, सुख, सुकुन और दुवाएं मिलती है ना वो किसी बड़ी से बड़ी बात में नहीं मिलेगी। इसलिए आप निस्वार्थ भाव से बस अपना फर्ज निभाते हुए लोगों की मदद करते रहिए,  क्योंकि मुश्किल समय में इंसानियत का होना बेहद जरूरी है।

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