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सफलता और संघर्ष

दोस्तों, कोई भी व्यक्ती जीवन में कब सफल होता हैं? आप सोचेंगे कि ये कैसा सवाल है, क्योंकि ये तो हम  सभी जानते हैं कि मेहनत करने पर ही व्यक्ती सफल हो सकता हैं। और ये बात सौ फीसदी सच है, और इसमें कोई संदेह भी नहीं है।

परंतु,और भी कुछ प्रमुख बातें हैं, जो आपको सफलता की ओर ले जाने में आपकी सहायता करती, वो हैं आपका संघर्ष, काम के प्रति आपका समर्पण व निष्ठा,स्वयं पर आपका विश्वास,आपकी सकारात्मक सोच और ईमानदारी। ये सभी मुख्य बातें हैं और यदि सिर्फ और सिर्फ इन पर ही ध्यान दिया जाए तो बाकी सारी चीजें गौण हो जाती है।

कई बार इंसान अपनी मंजील तक पहुंचने के मार्ग में आने वाली रुकावटों से घबरा जाता है,और संघर्ष करने के बजाय परिस्थितियों से हार मान लेता है। मगर संघर्ष से किस बात का डर, जबकि संघर्ष से तो हमारा रिश्ता, हमारे जन्म से ही जुड़  जाता है, क्योंकि मां के पेट में नौ महीने सुरक्षित रहने के बाद, हमें बाहर की दुनिया में आने और तुरंत ही नए परिवेश में सामंजस्य स्थापित करने के लिए कड़ा संघर्ष करना होता है,और उसमें हम अकेले ही होते हैं। तो फिर उस समय यदि हम इतना बड़ा संघर्ष अकेले ही कर लेते हैं, जब कि  हम बिल्कुल एक कमजोर से प्राणी होते हैं, तो फिर बड़े होने पर तो हमें और भी मजबूती से हर स्थति का सामना करना चाहिए।जब एक अबोध बच्चा, जीवन के लिए इतना प्रयास कर रहा है तो हम तो सब जानते समझते हैं।

यूं तो किसी भी कार्य में पूर्ण सफलता मिलने की तो कोई भी ग्यारंटी नहीं होती है,परंतु कोशिश तो हम कर ही सकते हैं और यदि असफलता के डर से हम मेहनत और संघर्ष ही ना करें, ये बात तो ठीक नहीं है।और शुरु में भले ही हम असफल हो जाएं, पर याद रखिए निरंतर कोशिश करते रहने से हमें सफलता अवश्य ही मिलेगी। आपने तो सुना ही होगा कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती है।बस बात है सब्र और विश्वास की।

आज के इस कॉम्पिटिशन के युग में, जहां कदम कदम पर चुनौतियां हैं,तो जरा सी असफलता हमारा मनोबल तोड़ कर रख दें, हमें स्वयं को इतना कमजोर नहीं बनाना है,बल्कि अपने अंदर उस हार से, दुगनी ताकत से लडने की क्षमता पैदा करनी है,और नाकामी को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखते हुए, दुगने जोश से हर  चुनौती का सामना करना है। और दिखा देना है अपनी ताकत को।

दुसरो से अपनी तुलना करने के बजाय अपनी खूबियों पर नजर रखें और उन्हें और निखारे। याद रखिए अगर आपमें प्रतिभा हैं,तो जिनकी नजर पारखी होती है, वे आपको पहचान ही लेते हैं। चाहे कितनी ही भीड़ क्यो ना हो, यदि वाकई में आप काबिल है तो आप हटकर ही दिखेंगे। और यदि आप पर कोई विश्वास करता है तो उस काम को करने में आप अपनी संपूर्ण ताकत झोंक दें और उसके विश्वास को सही साबित कर दे।

स्वयं को कभी भी कमजोर समझने की गलती ना करें। कमजोर वो होते हैं जो कोशिश ही नहीं करते हैं।अपने आप को हर तुफान का सामना करने के लिए सक्षम बनाने के लिए, निरंतर संघर्ष करते रहना चाहिए।

” करके दिखा दे, जो करने की तुने ठानी है,
क्योंकि कश्तियों की ज़िद के आगे तो,
तुफानों ने भी हार मानी है!!!!”


चाहें तो आप ये मानकर ही चलें कि ईश्वर ने आपके भाग्य में संघर्ष करना लिख कर ही भेजा है और आपको जन्म से लेकर मृत्यु तक संघर्ष ही करना है, तो आपकी जीवन यात्रा आसानी से कट जाएगी। संघर्ष से केवल वही इंसान डरता है, जो इसे करना नहीं चाहता। क्योंकि जिसने अपने आप को इस दुनियां में आने लायक बना लिया, उसे संघर्ष से क्या डर।

कुछ लोग थोड़ा सा प्रयत्न करके जल्दी ही हार मान लेते हैं,और सारा दोष अपनी किस्मत और ग्रहो पर डालकर  ज्योतिष का सहारा लेने लगते हैं। परंतु वे यह नहीं जानते हैं कि, ज्योतिष शास्त्र भी कर्म को ही महत्त्व देता है। एक सच्चा ज्ञानी आपको कर्म करने की ही सलाह देगा, बजाय हाथ पर हाथ धर कर बैठने के।याद रखें भगवान भी उसी की मदद करता है, जो कर्म करता है।

यदि हम अपने हाथों की रेखाएं परखने के बजाय, उन्हें अपने माथे से टपकते पसीने को पोछनें में उपयोग में लाएंगे तो हम खुद ही। अपने हाथों से अपना भविष्य सुंदर बनाएंगे।

कुछ लोग भविष्य की चिंता तो करते हैं, परंतु मेहनत से जी चुराते हैं। और अपना वर्तमान भी खराब कर बैठते हैं। सपने देखना कोई ग़लत बात नहीं है, पर सपने भी हमें हमारी काबिलियत और परिस्थिति को देखते हुए, देखना चाहिए,। ये एक कटू सत्य है पर जितनी जल्दी हम इस बात को समझ लें हमारे लिए उतना ही अच्छा होता है।  सपनों की दुनियां और  वास्तविकता में बहुत अंतर होता है। हम झूठे और नामुमकिन सपने देखते हैं और उनके पूरे ना होने पर निराश हो जातें हैं और जल्द ही हार मान बैठते हैं।और अपना आत्मनिरिक्षण करने के बजाय,अपनी नाकामी का ठीकरा कहीं और फोड़ते है।

हर इंसान अपने आप को और अपनी काबिलियत को दूसरों से बेहतर जानता है, अतः हम जितना संघर्ष कर सकते हैं हमें उसी के आधार पर सपने देखने चाहिए।

सबसे पहले तो आपको जीवन में  एक उद्देश्य रखना होगा, एक ध्येय निर्धारित करना होगा। उद्देश्य (purpose) निर्धारित करने से,आप आपके लक्ष्य तक एक सही दिशा में चलकर जाएंगे और आपका मूल्यवान समय और ऊर्जा दोनों ही बच जाएगी।और एक बार लक्ष्य तय करके पीछे मुड़कर नहीं देखना है।

सफलता,और संघर्ष दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। सफलता बिना संघर्ष किये हासिल हो जाएं तो ये कोई बुरी बात नही है। लेकिन संघर्ष और कड़ी मेहनत से हासिल होने वाली सफलता का स्वाद और मजा ही कुछ और है। जैसे दिन भर काम करके थक जाने पर, रात में जो गहरी और सुकून भरी नींद आती है, उसके जैसा तो सुख ही नहीं है।

किसी भी काम को पूरी शिद्दत के साथ करे, बहाने बनाने से आप अपना ही नुकसान कर बैठते हैं।याद रखिए लोगों का विश्वास हासिल करना जितना मुश्किल है उतना ही आसान है इसे गंवाना। अतः अपना कोई भी काम पूरी ईमानदारी से करें।

मेहनत का कोई भी विकल्प नहीं है। किसी भी मंजील तक पहुंचने के दो रास्ते तय है,ये आपकी बुद्धि और ईमानदारी पर निर्भर करता है कि आपको कौनसा रास्ता चुनना चाहिए।

पहला रास्ता, जो आपको आपकी मंजील तक जल्दी और आसानी से पहुंचा देगा,मगर झूठ और बेईमानी का सहारा लेकर।इस रास्ते पर चलकर आप वो सब हासिल कर सकते हैं, जो आप चाहते हैं, परंतु बदले में अपना सुकून देकर। याद रखिए झूठ की उम्र ज्यादा नहीं होती है।

दूसरा रास्ता, जो संघर्ष से तो भरा होगा, पर उसपर चलकर आप जो सफलता पाएंगे, वो आप को जीवन भर की खुशियां दे जाएगा और आपका भविष्य सुंदर और सुरक्षित करेगा।

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